Friday, December 20, 2013

ग्रे मैटर्स

एल्विन टॉफलर एक ब्रिलियंट फ्यूचरिस्ट और  लेखक है , उन्होने कई किताबे लिखी है।  मैंने उनमे से एक पढ़ी है , 'द थर्ड वेव'।  इस किताब में टॉफलर ने ह्यूमन सोसाइटी के  एवोल्यूशन को तीन वेव्स के माध्यम से समझाया है। पहली वेव में इंसान खेती-बाड़ी तक आया , दूसरी में फैक्ट्री और मशीनो तक आया  और उसके बाद की  वेव, यानि थर्ड वेव  में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और  फेसबुक तक आगया और अभी भी आगे जाता जा रहा है।  पहली वेव में उसकी चलती थी जिसके बाजुओं में जान थी , दूसरी वेव में उसकी चली किसकी मशीनो में जान थी और तीसरी वेव में याने अभी उसकी चलती है जिसके दिमाग में जान है।  ये जमाना उनका है जिनके पास " एक्शनेबल नॉलेज " है।  " एक्शनेबल नॉलेज " को ही हम आईडिया कहते है। बिल गेट्स के आईडिया से निकले माइक्रोसॉफ्ट ने उनको दुनिया का सबसे अमीर इंसान बना दिया , जितना पैसा कमाने में वारेन बुफे को 40 से ज्यादा साल लगे उतना बिल गेट्स ने 10 साल में पीट लिया। मार्क ज़ुकरबर्ग , लॉरी पेज , सर्जेई ब्रिन , स्टीव जॉब्स , लारी ऐलिसन , स्कॉट मेकनेली , विनोद खोसला , सबीर भाटिया या नारायणमूर्ति ये सब वो लोग है जिन्होंने अपने आइडियाज के दम पे दुनिया को बदल दिया। वाकई आज का जमाना उनका है जिनके पास आईडिया है , एक्शनेबल नॉलेज है।  

कई बार दिमाग लगाता हूँ कि कोई ऐसा ही पाथ-ब्रेकिंग आईडिया मेरे दिमाग में भी आजाए , जिस से मै दुनिया को बदल दूँ और मेरी भी दुनिया बदल जाए।  कुछ आइडियाज आते भी है लेकिन पता पढता है कि वो पेहले ही किसी के दिमाग में आ चुके है।  अभी थोड़े दिन पहले अख़बार में आया कि बिल गेट्स ने एक कांटेस्ट का  एलान किया है कि वो भविष्य के लिए एक बेहतर कॉन्डम इन्वेंट   करने वाले को एक लाख डॉलर देंगे।  एक ऑपर्चुनिटी नज़र आयी कि शायद कोई ऐसा आईडिया आ जाए कि बात बन जाए।  बहुत सोचा , बहुत तरीके से सोचा मगर नतीज़ा सिफर रहा।  इतना आसान रहता कि मेरे जैसे टॉम 'डिक ' हैरी के दिमाग में आजाए तो बिल गेट्स एक लाख डालर देते क्या ? पहली  बार सुनके एब्सर्ड सा नज़र आने वाला ये कांटेस्ट असल में बिल ने बड़ी दूरगामी सोच और बड़े फायदों को ध्यान में रखकर लांच किया है।  अफ्रीका और एशिया में सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियां हर साल लाखों लोगो की जान ले लेती है , इन् बीमारियों के इलाज़ में लगने वाला पैसा और इससे होने वाले मैनपावर और मेन डेज़ के नुकसान को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि लोगो को  कॉन्डम का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाये। सुना है कि इस कांटेस्ट में 800 से ज्यादा एंट्रीज़ आयी और उनमे से 11 को फाइनली शॉर्टलिस्ट किया गया है।  जल्द ही एक और आईडिया दुनिया में सुखद और आनंददायी बदलाव लेकर आने वाला है , मतलब ये कि 1 लाख डालर  का कांटेस्ट  सबको लाखो का सुख देने वाला है।  वैसे बिल गेट्स के कॉन्टेस्ट पे आप भी आईडिएटे करके देखना , दिमागी मासपेशियों की फर्टिलिटी का अंदाज़ हो जाएगा।  


Wednesday, December 18, 2013

आपके कमरे में कोई रहता है

आजकल आरडी बर्मन छाए हुए है मेरे म्यूजिकल इकोसिस्टम  में। वैसे हर अच्छे कंपोजर के लिए मेरे कान खड़े ही रहते है लेकिन बीच-बीच में कभी -कभी आरडी का दौरा पढता है , सुबह शाम आरडी आरडी , और हर दौरे में कुछ नया डिस्कवर करता हूँ आरडी के बारे में।     आरडी  अपने टाइम से आगे के कंपोजर थे , स्मार्ट और प्रोग्रेसिव म्यूजिक बनाते थे। आज आरडी का एरा बीते 20 साल से भी ज्यादा होने आए लेकिन उनके बनाये गानो से हर रेडियो स्टेशन और देश के कई नामचीन RJs अपनी दुकान चला रहे है।  मेरे ख्याल से जितनी ज्यादा रीमिक्सेस आरडी के गानों कि बनी है उतनी किसी कि नहीं।   रात १० बजे के बाद आप कोई भी FM लगा लीजिये , हर स्टेशन पे " क़तरा -क़तरा मिलती है " " रोज़ रोज़ आँखों तले " " तुम आगये हो नूर आगया है " या आरडी का ही कोई गाना बजता मिलेगा। आरडी बर्मन के समकालिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल , कल्याण जी आनन्द जी , खैय्याम, इलियाराजा , बप्पी लहरी  जैसे  असाधारण प्रतिभा के धनी  दिग्गज़  थे बाउजूद इसके आरडी ने अपने लिए एक निश् कार्व कर ली थी।  आरडी बर्मन ने  ही  हिंदी फिल्मो में  टेक्नोलॉजी बेस्ड म्यूजिक का  सूत्रपात  किया था ,  आरडी कि कम्पोज़िशंस तकनीकी  दृष्टि से उच्चकोटि कि होती थी , आप आरडी का कोई गाना एक अच्छे 5.1 ऑडियो सिस्टम में सुनिये आपको लगेगा कि ये आज के हाईटेक स्टूडियो में रिकॉर्ड किया गया है जबकि आरडी के गाने उस वक़्त रिकॉर्ड हुए थे जब ना तो  200  ट्रैक कंसोल होते थे , नहीं लेयर्ड रिकॉर्डिंग , ना डिजिटल रिकॉर्डिंग और ना आई-पेड रिकॉर्डिंग। आरडी अपने समय में उपलब्ध सबसे अच्छी टेक्नोलॉजी का उपयोग करते थे , इसी वजह से उनकी प्रयोगधर्मिता ज्यादा प्रभावकारी रूप में सामने आती थी।

ऐसे ही गिटार का जितना ज्यादा और जितना खूबसूरत इस्तेमाल आरडी ने किया उतना हिंदी के किसी कंपोजर ने नहीं किया। भारत में हिप्पी कल्चर को जिन जिन फैक्टर्स ने फॉस्टर किया उसमे आरडी कि गिटार बेस्ड कम्पोज़िशंस का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है।  " दम मारो दम " में  आजभी उतना ही  दम है  जितना तब था। मुझे याद है , मुझे कीबोर्ड सिंथेसाइज़र सीखने वाले मेरे सर  श्री विनोद गोलछा के यहाँ जितने भी  लोग गिटार सीखने आते थे सबकी एक प्रबल इच्छा होती थी कि सबसे पहले ' यादों कि बारात ' का " चुरा लिया है तुमने " सीखें क्योकि इस गाने के शुरू में गिटार का जो पीस है वो कातिल है और बजाने में बड़ा आसान भी है ।   आरडी के गानो में गिटार कि कॉर्ड्स एकदम इनटेन्स होती है  और स्पष्ट सुनाई देती है , गिटार की समझ रखने वाले आसानी से फिगर आउट कर लेते है कि कॉर्ड मेजर है , माइनर है, सेगमेंटेड है, बार्र्ड है  या सेवंथ है। इसीलिए गिटार सीखने वालों को आरडी के गाने या फिर  आज का सूफी रॉक ( कैलाश खेर वाला जॉनर ) बड़ा मुफीद लगता है।

आरडी बर्मन का ज़िक्र गुलज़ार के बिना अधूरा है , और गुलज़ार का ज़िक्र भी आरडी बर्मन के बिना कभी मुकम्मल नहीं होगा ।  दोनों ने मिलके हिंदी फ़िल्म म्यूजिक को जितना  समृद्ध किया और जो ऊंचाइया दी वो सब जानते है।  'आंधी ' 'घर ' 'घरोंदा ' ' परिचय ' ' मासूम ' 'खूबसूरत ' 'किनारा ' ऐसी अनेक फिल्मे है जो इन दोनों कि जुगलबंदी ने अमर कर दी है।  गुलज़ार जैसे बेलगाम और 'बेमीटर' लिरिसिस्ट को अगर किसीने  सबसे बेहतरीन ढंग से सुरों में बांधा है तो वो आरडी बर्मन ही थे।  और अब ये काम ए आर रहमान और विशाल भारद्वाज कर रहे है।  गुलज़ार कुछ भी लिख देते थे और आरडी बर्मन उस कुछ भी कि धुन बना देते थे।  इनके बारे में एक किस्सा फेमस है , एक बार गुलज़ार कुछ लिख के लाये और आरडी को उसकी धुन बनाने को कहा , आरडी ने पढ़ा और झुंझलाकर कहा  कि ये क्या  लिख के लाए हो  ?  कल से तुम टाइम्स ऑफ़ इंडिया का एडिटोरियल उठा के लेआओगे और कहोगे कंपोज़ करो !!  वो गाना था फ़िल्म 'इजाज़त ' का " मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पढ़ा है "।  

एक और बात जो आरडी बर्मन के संगीत को खास और अलग बनाती  थी वो थी उनकी खुद की गायकी , आरडी बर्मन अपने नाम " पंचम " कि मानिद पंचम सप्तक के गायक थे,  ऊँचे सुर में गाते थे।  आवाज़ में थोड़ी कर्कशता थी मगर बेसुरे नहीं  थे कभी।  " समंदर में नहा के और भी नमकीन हो गयी हो " " तुम क्या जानो मोहोब्बत क्या है " " मेहबूबा मेहबूबा " " दिल लेना खेल है दिलदार का " इन गानो में आरडी का म्यूजिक तो था ही लेकिन इन गानो का यूएसपी आरडी बर्मन की  आवाज़ थी।  आरडी बर्मन के जाने से जो वैक्यूम पैदा हो सकता था उसकी भरपाई ए आर रहमान ने कर दी।  मेरे हिसाब से रहमान आरडी 2.0 है।  वही सारे गुण।  टेक्नोलॉजी का बेमिसाल इस्तेमाल , प्रयोगधर्मिता , रेंज  और वैसी ही हटकर आवाज़।  फिल्म्फ़ेयर ने जब " आरडी बर्मन अवार्ड फॉर बेस्ट इमर्जिंग म्यूजिशियन " शुरू किया तो पहला अवार्ड एआर रहमान को ही मिला था।  





Tuesday, December 17, 2013

बर्ल्ड बाइड बेब

ब्लॉग के पेजव्यूज़ का लेखा- जोखा देख  रहा था , इंडिया, यूएसए और यूके के पेज व्यूज़ तो वाज़िब लगते है।  फेसबुक के बहोत सारे परिचित है इन तीन देशों से। कुछ अच्छे दोस्त भी रहते है यूएस/यूके में।  लेकिन यूक्रैन , जमैका , पोलैंड , घाना यहाँ कौन देखता होगा ??   ये शायद वो लोग है जिन्होंने कुछ और सर्च करना चाहा होगा और मेरे ब्लॉग में घुस गए होंगे।  खैर जो भी हो , सोच के अच्छा लगता है , जहाँ संत न पहुचे वंहा संत की वाणी पहुच गयी।


Monday, December 16, 2013

ARR is back



ARR is back ...Can bet my last penny for the Music is gonna be  a blockbuster ..Imtiaz Ali best knows how to make ARR produce the freshest tracks .. Rockstar still rocks....See this teaser trailer and  if u are a staunch ARR fan , u will start havin goosebumps...Rahmanishq  ..Rahmania ...whatever u call it. 

Chinese Humor

कल की पोस्ट चाइने का माल नी है पढ़ने के बाद दो लोगों ने फ़ोन लगाये। उनमे से एक ने चीन को लेकर थोड़ी देर चर्चा की और दूसरे ने चीन के ऊपर जोक  सुनाया  , 

एक हिंदुस्तानी कि चाइनीज़ महिला   से   शादी होती है , २ साल के बाद चाइनीज़ महिला गुज़र जाती है। संता  उसके यहाँ शोक व्यक्त करने आता है और कहता है " यार दुखी न हो , चाइनीज़ माल था  और कितना चलता " 

फिर चीन पे उनको  एक  जोक मैने सुनाया 

संता के यहाँ दूसरी संतान पैदा होती है , बर्थ सर्टिफिकेट में संता उसका नाम लिखवाता है "किआंग ज़ेपिन" 

लोग पूछते है , ये चाइनीज़ नाम क्यों ? 

 संता जवाब देता है " क्योकि मैंने अखबार में पढ़ा था कि दुनिया मै पैदा होने वाला हर दूसरा बच्चा चाइनीज़ होता है " 

चीन पे एक दिन डिटेल में लिखूंगा, IA