Friday, February 28, 2014

रौनक़

"रौनक " - कपिल सिब्बल की कविताओ का संकलन , जिसे ए  आर रहमान ने संगीतबद्ध किया है।  "किस्मत से"  इसका पहला ट्रैक है।  

Thursday, February 27, 2014

भोले आलू - The Humble Potatoes

भोले आलू - The Humble Potatoes 




हर - हर महादेव।   सभी को शिवरात्रि महापर्व की हार्दिक शुभकामनाये।  आज सभी शिव भक्ति में   लीन रहेंगे और सात्विक भोजन और फलाहार करेंगे।  पेश है एक ऐसी उपवासी  डिश , जो बनाने में मैगी जितनी आसान है और बेहद सात्विक और स्वादिष्ट भी।

2 लोगों की सर्विंग के हिसाब से

सामग्री -
मीडियम  साइज़ के उबले हुए आलू -6
रोस्ट की हुई  मूँगफली - 50 ग्राम
बारीक कटी हरी मिर्च - 2
शुद्ध घी - 25 ग्राम
जीरा - 1 टीस्पून
पिसी चीनी - 1 टीस्पून
नमक - स्वादानुसार ( उपवास के लिहाज़ से सेंधा नमक - Rock Salt -ज्यादा मुफीद रहता है ) 
हरा धनिया , नीबू और दही 

बनाने का तरीका -

उबले हुए आलू को मीडियम साइज़ के चौकोर टुकड़ो में काट लें।  कढ़ाई में घी डालकर , उसमे जीरा और हरी मिर्च को तड़का लें।  इसके बाद उसमे आलू डालकर धीमी आंच पर कुरकुरे होने तक रखे।  बीच -बीच में आलुओं को चलाते रहे।  जब आलू कुरकुरे होकर हल्के सुनहरे रंग के होने लगे तब उसमे मूँगफली के दानो को क्रश करके डालें और साथ में नमक पिसी चीनी डालकर एक मिनट  और चलाए।  तैयार है "भोले आलू " 

बारीक कटे हुए हरे धनिये से गार्निश करे और दही , नीबू के साथ सर्व करें।  













Wednesday, February 26, 2014

RUMI-1



Let the beauty we love be what we do.

There are hundreds of ways to kneel and kiss the ground


रूमी की लिखी ये दो पंक्तियाँ कितनी गेहरी है।  वैसे तो रूमी का पूरा साहित्य ही अलौकिक और रहस्यमय् है। मगर इन दो पंक्तियों में जो दर्शन है वो टाइम टेस्टेड है।   हमारे आसपास मौजूद हर शह खूबसूरत है , हर काम अच्छा है।  लेकिन जो भी किया जाए ,  उसे शिद्दत से किया जाए।  और वही काम  किया जाए जिसका  जूनून हो। गोयाकि जब हम वही करेंगे जिसका हमें जूनून है तो फिर हम उसमे खुद को निसार कर देंगे , झोंक देंगे और ये ठीक वैसे ही रहेगा जैसे खुदा की इबादत करना।  सजदा करना।

जिस बात को आज बड़े बड़े मेंटर्स और मैनेजमेंट थिंकर्स बोलते है वह बात रूमी आज से लगभग 800 साल पहले बोल गए। चेतन भगत के " फाइव पॉइंट समवन " और राजकुमार हीरानी की  " थ्री इडियट्स " में भी यही मेसेज था।  

बहरहाल , आज ये कविता आज  इसलिए याद आ गयी क्योकि कुछ दिनों में " रौनक़ " नाम से  कपिल सिब्बल ( वकील  एवं  राजनेता ) की लिखी कविताओ का एक म्यूजिकल एल्बम रिलीज़ होने वाला है , उसके प्रोमो के शुरू में रूमी की ये दो पंक्तियाँ दिखायी जा रही है। कपिल सिब्बल साहब ने तो जो भी काम किया है आला दर्ज़े का ही किया है।  वकील भी उच्च दर्ज़े के और राजनीतिज्ञ  भी प्रथम पंक्ति के।  निस्न्देह वो कवी भी बेहतरीन ही होंगे।  इस एल्बम को कंपोज़ ऐ आर रहमान ने किया है. 

यम मारो यम Feasible Ideaz..Funtastic Food

ये मेरे नए ब्लॉग का नाम है। इसका URL  http://foodmatics.blogspot.in है।  YMY एक Multi Admin Blog रहेगा जिस पर मै और कुछ दूसरे ऑथर्स भी अपनी पोस्ट डालेंगे।  YMY पर हम  खाने पीने से संबधित दिलचस्प जानकारियां और आसानी से बन सकने वाली रेसिपीज़ डालते रहेंगे।  

कृपया जुड़े रहिएगा।  
http://foodmatics.blogspot.in/

Tuesday, February 18, 2014

आज की स्कीम




'सोम-रस' की कविता  

मैकदे में खिचती कभी लकीर नहीं 
यहाँ कोई खादिम नहीं कोई पीर नहीं 
हम -प्याला हुए बैठे है हबीब और रक़ीब 
आस्तीनो में ख़ंजर हाथों में शमशीर नहीं 
बेफिक्री के धुंए का ग़ुबार फैला है अंधेरो में 
चेहरे पे शिकन माथे पे कोई लकीर नहीं 

- हिमांशु जोशी