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Sunday, May 11, 2014

रिश्तों की दुकानदारी

" प्लीज फ़ोन उठालो , तुम्हारी  मॉम ने एक घंटे से कॉल कर -कर के प्राण ले रक्खे है।  दो मिनट बात कर के पूछ लो ऎसी उतावली क्यो हो  रही है। और तुम  ऐसा क्या कर रहे हो इतनी देर से कंप्यूटर पे " ? 

"तुम उनको फ़ोन करके बोल दो कि मै बिज़ी हुँ , थोड़ी देर से कॉल कर लूंगा "

"लेकिन तुम ऐसा क्या   कर रहे हो यार " ?????

"मैं फेसबुक पे पोस्ट करने के लिए एक अच्छा सा " मदर्स डे " कोट गूगल कर  रहा हूँ।  "



Thursday, April 10, 2014

पेपरलेस वर्किंग

" हमारे सारे वेंडर्स , बिजनेस पार्टनर्स , असोसिएट्स और कस्टमर्स को एक ई -मेल करो और जिसमे उन्हें विस्तार से लिखो कि आईटी और इंटरनेट के ज़माने में पेपरलेस वर्किंग कितनी किफायतमंद है।  उन्हें ये भी बताओ की ये फास्ट भी है और कनविनिएंट भी , और ये भी कि इस से हम कागज़ों के गैर -ज़रूरी उपयोग को कम कर सकते है जिस से हम कई सारे पेड़ों को कटने से बचा सकते है  और पर्यावरण के सरंक्षण में योगदान दे सकते है   इसलिए आगे से वो सभी हमसे सारे करस्पोंडेंस और कम्युनिकेशन ई-मेल के मार्फ़त ही करें  " 

"जी सर " 

" और हाँ , इस ई -मेल  का  प्रिंट आउट निकाल कर हार्ड कॉपी फाइल कर देना और एक कॉपी मुझे भी दे देना " 

Thursday, March 13, 2014

'कास्ट' कटिंग

कॉस्ट कटिंग आजकल बज़वर्ड बन गया है।  प्रदीप मेरे ऑफिस का कैंटीन बॉय है , आज चाय पिलाने आया तो किसी ने कहा " प्रदीप चाय की क्वांटिटी आधी कर दे आजकल 'कास्ट कटिंग ' चल रही है।  प्रदीप ने तपाक से जवाब दिया " मै उसकी जगह चाय की कीमत बढ़ा दूंगा "।  
प्रदीप ने इतना कहाँ और चाय रखकर अगले डिपार्टमेंट की और बढ़ गया लेकिन प्रदीप की बात मेरे  दिमाग में ठहर गयी और  ये धारणा भी मजबूत हो गयी कि व्यवसायिक  समझदारी केवल पढ़े लिखों की बपोती नहीं होती।  प्रदीप ने जो बात एक लाइन में कही उसे लोग 2 साल के MBA या सालो की  नौकरी के बाद भी नहीं समझ पाते।  लाभप्रदता बढ़ने के लिए लागत घटाना  या खर्चे काटना  कभी लास्टिंग सोल्यूशन नहीं हो सकता , ज्यादा बेहतर है कि आमदनी बढ़ाई  जाए।  

Sunday, March 2, 2014

CLASSIFRAUDS

न्यूज़पेपर के साथ आने वाले क्लासिफाइड्स पेज को ज़्यादातर लोग रद्दी में पटक देते है। जिन लोगो को ज़मीन ज़ायदाद , विवाह सम्बन्ध जैसी  जैसी कोई स्पेसिफक ज़रूरत रहती है वो ही क्लासिफाइड्स को खंगालते है।  लेकिन कभी फुर्सत रहे तो क्लासिफाइड्स सेक्शन में झांक के देखिएगा आपके  सामान्य ज्ञान में भरपूर  इज़ाफा होगा और आपको पता चलेगा कि ऐसे अनेक मस्ले जिन्हे आप कभी  सुलझा नहीं पाये  उनका इलाज़ क्लासिफाइड्स में छुपा था । 




क्लासिफाइड्स पढ़कर ही आपको पता चलेगा कि बैंको द्वारा लोन चुकाने के लिए लगाये जा रहे तगादों से परेशान होकर किंगफ़िशर ने खुद अपना बैंक खोल लिया है जिसमे लोन पर  1 प्रतिशत ब्याज़ लगता है  और 40 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।  इसके अलावा RBI ने TATA और MAHINDRA को भी बैंक खोलने की इज़ाज़त देदी है बशर्ते वो भी किंगफ़िशर की लाइन्स पर 1 % ब्याज़ लगाये  और 40 % की छूट दें।  


क्लासिफाइड्स में उन लोगो के लिए भी खुशखबरी छिपी है जिन लोगो को रेलवे में सरकारी नौकरी की दरकार है।  रेलवे ने  अपने रिक्रूटमेंट बोर्ड्स को ख़त्म कर दिया है और तमाम नौकरियां अब इन टटपुन्जे  क्लासिफाइड्स के मार्फ़त बाटी जा रही है।  



ये क्लासिफाइड्स देश के तमाम नामी अख़बारों में रोज़ छपते है और रोज़ लाखों लोगो की नज़रों के सामने से गुज़रते है।  एक सामान्य पाठक को बेशक ये क्लासिफाइड्स भ्रामक और बेहूदा लग सकते है लेकिन वो लोग जो तकलीफशुदा है और सारे उपाय करके हार चुके है उन्हें इन क्लासिफ्राडस में भी उम्मीद की किरण नज़र आती है और ऐसे ही लोग इन क्लासिफाइड्स के चक्कर में ठगे जाते है।  मज़े कि बात है कि इन्हे पब्लिश करने वाले अखबार अंग्रेजी में एक छोटा सा नोटिस ( केवियट) डालकर अपनी ज़िम्मेदारियों से  बरी हो जाते है और फिर ठगी के शिकार लोगो के बारे में बड़ी- बड़ी न्यूज़ बनाकर पत्रकारिता धर्म का ढोंग करते है।  


और ये है सारे क्लासिफाइड्स का बाप - 





Tuesday, February 11, 2014

ॐ मेरे आका

फुर्सत में बैठा इंसान बिला वजह खोजी और बुद्धिजीवी होने का प्रयास करता है।  आज घर में निठल्ले बैठे -बैठे पिस्ते के इस ज़िपर  पाउच पर नज़र पढ़ी।  ॐ मेरे आका अमेरिकन USA रोस्टेड  एन साल्टेड पिस्ता 


दिल्ली की किसी फर्म ने इसे इम्पोर्ट करके रीपेक किया है।  बड़े ही समझदार और दूरदर्शी व्यापारी मालूम पढ़ते है।  'लास (एंजिलिस)' होने की कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी।  अलादीन का  जिन्न  अगर माल नहीं बेच सका तो शंकर भगवान के नाम से तो  लोग खरीद ही लेंगे और अगर शंकरजी भी काम नहीं आये तो अमेरिका का नाम तो है ही। अमेरिका के नाम पे तो हमारे लोग सड़ी हुई 'मूमफली' को भी पिस्ता समझके खाने को तैयार रहते है।  वैसे " क्या हुक्म मेरे आका " की जगह "ॐ मेरे आका" सुनना फनी सा नहीं लगता ?   जैसे जिन्न वाराणसी या उज्जैन में आकर बस गया हो।  










Friday, February 7, 2014

पिराक लोर नेर्टींन

हिंदीभाषी प्रान्त से होने और हिंदी प्रेमी होने की वजह से  हिंदी की भाषागत् , मात्रा या  व्याकरण की गलतियों पर मेरी नज़र ज़रा ज्यादा ही जाती है।  10 दिन अहिंदीभाषी शहरों में घूमा तो ये देखा -






एक प्रसिद्द मंदिर के प्रवेश द्वार पर ये बोर्ड  लगा था -



लेकिन सबसे ज्यादा कौतूहल शौचालयो के ऊपर लगे बोर्ड्स ने पैदा किया।सारे शौचालयों पे " पिराक लोर  नेर्टींन " लिखा था।  थोडा विचारमंथन किया तो समझ आया कि क्या आशय है  "  पिराक लोर  नेर्टींन  " से







Thursday, December 12, 2013

शादी के ब्राइट इफेक्ट्स

आज मोबाइल पर एक जोक  आया , कुछ यूँ था : 

एक आदमी ट्रैन में चढ़ रहा था कि आकाशवाणी हुई " बच्चा इसमें मत चढ़ ये ट्रैन पटरी से उतरने वाली है " 
उस आदमी ने बस से यात्रा करने का विचार किया , जैसे ही वो बस में बैठने लगा फिर से आकशवाणी हुई " बच्चा इस बस में मत बैठ ये बस खाई में गिरने वाली है " 
उस आदमी ने फिर विचार बदला और हवाई जहाज़ से जाने का सोचा। जैसे ही वो हवाई जहाज़ में बैठने गया , फिर से आकाशवाणी हुई " बच्चा इस हवाई जहाज़ में मत बैठ ये क्रैश होने वाला है " 

फाइनली वो आदमी परेशां हो उठा और उसने आसमान को देख कर पूछा " ये कौन है ? जो बार बार आकाशवाणी कर मुझे बचा रहा है ?? 

जवाब आया " बच्चा में भगवान् हूँ " 

आदमी ने बड़ी पीढ़ा से कहाँ " भगवान् जिस दिन मै  घोड़ी पे चढ़ रहा था उस दिन क्या आपका गला ख़राब था ? " 

ये लतीफा एक अननोन नंबर से आया था , जिसने भी भेजा होगा वो करीबी ही रहा होगा क्योकि आज( 13 दिसंबर को)  मेरी शादी की  सातवी सालगिरह है।  

शादी को लेकर जोक्स बनाना और पत्नियों को लेकर व्यंग करना बड़ा ही आम है।  लेकिन जो लोग ऐसा करते है वो उन लोगो कि राह में मुश्किल पैदा करते है जिन्हे अभी शादी करना है।  ऐसे जोक्स पढ़ पढ़ के एस्पायरिंग लड़के लड़कियां कंफ्यूज होते है , डर भी जाते है। रही सही कसर टीवी के सोप्स  पूरी कर देते है।    लगता है शादी करके ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी।  आज़ादी छिन जाएगी।  लड़कियों को सबसे बड़ा डर सामूहिक परिवार और घर के कामों को लेकर होता है। लड़कियों के दिमाग में यह भी  आता है कि   पता नहीं कैसा जल्लाद निकलेगा पति और सास- ससुर ड्रैकुला के रिश्तेदार जो हर वक़्त खून पियेंगे। कई लोग एक्सपर्ट कमेंटस् देते मिल जाएंगे " भाई शादी तो एक लाटरी है " " शादी का  लड्डू जो खाए पछताए जो न खाए वो भी पछताए " आदि आदि।  शादी पे एक और कोट पढ़ा था कभी " Everyone should get married after all happiness is not the only thing in life "  शादी के ऊपर हज़ारों quotes है ऐसे।  शादी की  बात आते ही हर विवाहित एकदम मुखर और दर्शनशास्त्री टाइप हो जाता है। मेरे ख्याल से आदमी  के लिए शादी एक मेटामॉरफोसिस है , जो उसे इल्लीनुमा कीड़े से पतंगा बना देती है।  इसीलिए ये देखा गया है कि शादी के बाद आदमी ज्यादा फड़फड़ाने लगता है।  शादी पे एक और बड़ा सतही कोट है " marriage is the price that men pay for sex and sex is the price that women pay for marriage" ये सिर्फ शब्दो की बाज़ीगरी है  इसमें कोई तर्क या यथार्थ नहीं है ।  फरहान अख्तर और विद्या बालन की मूवी आने वाली है " शादी के साइड इफेक्ट्स " मेरे ख्याल से ये मूवी शादी जैसे निहायत ही नाज़ुक और जस्बाती विषय के साथ न्याय करेगी और बहोत सारे डरे हुए और कन्फ्यूज्ड युवा और युवतियों को प्रेरित करेगी शादी के बंधन में बंधने के लिए। शादी के साइड इफेक्ट्स हो या न हो शादी के बहोत से ब्राइट इफेक्ट्स होते है , जो शादी के बाद ही समझ आते है।
बिना मरे स्वर्ग नहीं है।  

और आखिरी में ये भी -

शादी करने के बाद और मोबाइल फ़ोन खरीदने के बाद दिल में क्या ख्याल आता है ?
ये कि थोड़े दिन और रुक जाता तो ज्यादा बेहतर मॉडल मिल जाता ;)







चित्र कथा

एक चित्र एक हज़ार शब्दो के बराबर होता है।
ये है हजार हजार शब्द के दो निबंध , एक हमारी शिक्षा प्रणाली पर और दूसरा हमारी जीवन  प्रणाली पर।  दोनों निबंध मेरे लिखे नहीं है , संकलित है।

Thursday, September 12, 2013

अफीमचियों की बस्ती


जर्मन इक्नामिस्ट फिलास्फर कार्ल मार्क्स ने बड़े फेमस्ली कहा है " Die Religion .. ist das Opium des Volkes "  मतलब Religion is the Opium of the People धर्म लोगो का नशा है।  अफीम का नशा
फिल्म ऒह माय गॉड के  क्लाइमेक्स में परेश रावल से  धर्मगुरु (मिथुन चक्रबोर्ति ) यही बोलता है कि लोग ज्यादा दिन हमारे बिना नहीं रह पाएँगे क्योकि धर्म इन लोगो का नशा है। अफीमची भी कई प्रकार के है, छोटे अफीमची बड़े अफीमची , कट्टर अफीमची , पागल अफीमची, फनाटिक अफीमची , चतुर अफीमची , बेवकूफ अफीमची। इन सबके ऊपर है  अफीमचियों को नचाने वाले मदारी और अफीम के सप्लायर। कुछ लोग अपनी अफीम की तलब को कस्टमाइज कर लेते है।  एक मेरा  दोस्त है जो  बुधवार  को नॉन-वेज नहीं खाता क्योकि उस दिन वो गणेशजी के मंदिर जाता है   ।  एक और है वो सोमवार को दारू नहीं पीता  क्योकि सोमवार शंकरजी का दिन है। इन अफीमचियों ने अपनी तलब को कस्टमाइज कर लिया है।

आजकल McD का एक एड आता है उसमे भी यही दिखाते है कि Tuesday होने के कारण अगर आप  चिकन मसाला  बर्गर नहीं खा सकता तो McD पे Veg मसाला बर्गर भी है।  क्योकि McD वाले भी जानते है कि इंसान बर्गर खाना छोड़ सकता है पर अफीम खाना नहीं।लोग हैरान होते है कि कैसे लाखो करोडो लोग एक ठरकी कथा वाचक बाबा के ऐसे अंधे भक्त हो सकते है  , जवाब है अफीम की तलब , सालो से जिन लोगो को धर्म की अफीम की लत है उन्हें क्या करना कि बाबा ठरकी है , उन्हें अफीम की आदत है और उनकी पसंद की अफीम बाबा देता है। इसलिए डरते है सारे नशेडी कि बाबा  की दुकान बंद हो गयी तो उनको अफीम कौन खिलाएगा।  और क्या पता फिर  अफीम में नशा  ही ना रहे।

गणपति की धूम है अभी, सुबह से जो भोपू बजना शुरू होते है तो फिर आधी रात के बाद ही रुकते है  , घर के पास एक झांकी से अभी शाम को एलान हो रहा था कि जिस  किसी सज्जन को तम्बोला खेलना है वो शीघ्र आजाए क्योकि आरती के बाद तम्बोला खेला जाएगा।

सब अफीमची है।

गणपति बप्पा मोरिया गणपति बप्पा मोरिया
अब तो भोपू बंद करदो सारा देश सोरिया


Tuesday, September 10, 2013

तुलसीजी में अंडा

एक मज़ेदार बात हुई।  3 दिन घर बंद था क्योकि सब बाहर गये थे , कल वापस आये तो देखा बालकनी में रखे तुलसी के गमले में कबूतर ने ( precisely कबूतरनी ने ) अंडा दे दिया है।

बड़ा धर्म-संकट है अब , बीबी बोलती है अंडा हटाओ तुलसीजी को जल  कैसे देंगे , हमारी तुलसीजी मुरझानी नहीं चाहिए।
 अंडा हमारे लिए अंडा है , 50 रूपए में एक दर्जन लेकिन कबूतरनी के लिए सिर्फ अंडा नहीं है। लेकिन  तुलसीजी भी कोई बगीचे का पौधा नहीं है, गुलाब या गेंदा जैसे।

अंडे को छेड़ा तो कबूतरनी का miscarriage हो सकता है और नहीं छेड़ा  तो फिर तुलसीजी को जल कैसे चढ़ेगा।  एक तरीका ये हो सकता है कि एक टेम्पररी घोंसला बनाया जाये और उसमे अंडे को शिफ्ट किया जाए

।