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Thursday, April 10, 2014

पेपरलेस वर्किंग

" हमारे सारे वेंडर्स , बिजनेस पार्टनर्स , असोसिएट्स और कस्टमर्स को एक ई -मेल करो और जिसमे उन्हें विस्तार से लिखो कि आईटी और इंटरनेट के ज़माने में पेपरलेस वर्किंग कितनी किफायतमंद है।  उन्हें ये भी बताओ की ये फास्ट भी है और कनविनिएंट भी , और ये भी कि इस से हम कागज़ों के गैर -ज़रूरी उपयोग को कम कर सकते है जिस से हम कई सारे पेड़ों को कटने से बचा सकते है  और पर्यावरण के सरंक्षण में योगदान दे सकते है   इसलिए आगे से वो सभी हमसे सारे करस्पोंडेंस और कम्युनिकेशन ई-मेल के मार्फ़त ही करें  " 

"जी सर " 

" और हाँ , इस ई -मेल  का  प्रिंट आउट निकाल कर हार्ड कॉपी फाइल कर देना और एक कॉपी मुझे भी दे देना " 

Thursday, March 13, 2014

'कास्ट' कटिंग

कॉस्ट कटिंग आजकल बज़वर्ड बन गया है।  प्रदीप मेरे ऑफिस का कैंटीन बॉय है , आज चाय पिलाने आया तो किसी ने कहा " प्रदीप चाय की क्वांटिटी आधी कर दे आजकल 'कास्ट कटिंग ' चल रही है।  प्रदीप ने तपाक से जवाब दिया " मै उसकी जगह चाय की कीमत बढ़ा दूंगा "।  
प्रदीप ने इतना कहाँ और चाय रखकर अगले डिपार्टमेंट की और बढ़ गया लेकिन प्रदीप की बात मेरे  दिमाग में ठहर गयी और  ये धारणा भी मजबूत हो गयी कि व्यवसायिक  समझदारी केवल पढ़े लिखों की बपोती नहीं होती।  प्रदीप ने जो बात एक लाइन में कही उसे लोग 2 साल के MBA या सालो की  नौकरी के बाद भी नहीं समझ पाते।  लाभप्रदता बढ़ने के लिए लागत घटाना  या खर्चे काटना  कभी लास्टिंग सोल्यूशन नहीं हो सकता , ज्यादा बेहतर है कि आमदनी बढ़ाई  जाए।  

Sunday, March 2, 2014

CLASSIFRAUDS

न्यूज़पेपर के साथ आने वाले क्लासिफाइड्स पेज को ज़्यादातर लोग रद्दी में पटक देते है। जिन लोगो को ज़मीन ज़ायदाद , विवाह सम्बन्ध जैसी  जैसी कोई स्पेसिफक ज़रूरत रहती है वो ही क्लासिफाइड्स को खंगालते है।  लेकिन कभी फुर्सत रहे तो क्लासिफाइड्स सेक्शन में झांक के देखिएगा आपके  सामान्य ज्ञान में भरपूर  इज़ाफा होगा और आपको पता चलेगा कि ऐसे अनेक मस्ले जिन्हे आप कभी  सुलझा नहीं पाये  उनका इलाज़ क्लासिफाइड्स में छुपा था । 




क्लासिफाइड्स पढ़कर ही आपको पता चलेगा कि बैंको द्वारा लोन चुकाने के लिए लगाये जा रहे तगादों से परेशान होकर किंगफ़िशर ने खुद अपना बैंक खोल लिया है जिसमे लोन पर  1 प्रतिशत ब्याज़ लगता है  और 40 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।  इसके अलावा RBI ने TATA और MAHINDRA को भी बैंक खोलने की इज़ाज़त देदी है बशर्ते वो भी किंगफ़िशर की लाइन्स पर 1 % ब्याज़ लगाये  और 40 % की छूट दें।  


क्लासिफाइड्स में उन लोगो के लिए भी खुशखबरी छिपी है जिन लोगो को रेलवे में सरकारी नौकरी की दरकार है।  रेलवे ने  अपने रिक्रूटमेंट बोर्ड्स को ख़त्म कर दिया है और तमाम नौकरियां अब इन टटपुन्जे  क्लासिफाइड्स के मार्फ़त बाटी जा रही है।  



ये क्लासिफाइड्स देश के तमाम नामी अख़बारों में रोज़ छपते है और रोज़ लाखों लोगो की नज़रों के सामने से गुज़रते है।  एक सामान्य पाठक को बेशक ये क्लासिफाइड्स भ्रामक और बेहूदा लग सकते है लेकिन वो लोग जो तकलीफशुदा है और सारे उपाय करके हार चुके है उन्हें इन क्लासिफ्राडस में भी उम्मीद की किरण नज़र आती है और ऐसे ही लोग इन क्लासिफाइड्स के चक्कर में ठगे जाते है।  मज़े कि बात है कि इन्हे पब्लिश करने वाले अखबार अंग्रेजी में एक छोटा सा नोटिस ( केवियट) डालकर अपनी ज़िम्मेदारियों से  बरी हो जाते है और फिर ठगी के शिकार लोगो के बारे में बड़ी- बड़ी न्यूज़ बनाकर पत्रकारिता धर्म का ढोंग करते है।  


और ये है सारे क्लासिफाइड्स का बाप - 





Friday, February 7, 2014

गुलाबी गेंग

आज एक पुराना कोटेशन याद आगया,  Man loves little and often,woman much and rarely.... .प्रसंग ये था कि आज से वैलेंटाइन वीक शुरू हो गया है।मेरे घर के पास गुलदस्तों की दुकाने है लाइन से काफी सारी सो में भी गुलाब के फूल लेने वंहा रुक गया। फूलों कि दुकानो पे लड़के- लड़कियां ऐसे टूट रहे थे जैसे गुरूद्वारे के लंगर में मुफ्त का खाना बट रहा हो। 
  एक ख़ास बात नोटिस की कि ज़्यादातर  लड़कियां पीला गुलाब ले रही थी ( पीला गुलाब मतलब दोस्ती ) और लड़के सभी लाल गुलाब ले रहे थे ( लाल गुलाब मतलब प्यार )।  घर पे आकर बीबी को ये ऑब्जरवेशन सुनाया तो बोली " क्योकि लड़कियों की नज़रों में  फ्रेंडशिप ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है"।"और लड़कों के लिए दोस्ती वेटिंग का टिकट है जो कन्फर्मेशन की उम्मीद से खरीदा जाता है , जो कन्फर्म नहीं हुआ तो दूसरी ट्रैन पकड़ लेंगे"।   

Friday, December 20, 2013

ग्रे मैटर्स

एल्विन टॉफलर एक ब्रिलियंट फ्यूचरिस्ट और  लेखक है , उन्होने कई किताबे लिखी है।  मैंने उनमे से एक पढ़ी है , 'द थर्ड वेव'।  इस किताब में टॉफलर ने ह्यूमन सोसाइटी के  एवोल्यूशन को तीन वेव्स के माध्यम से समझाया है। पहली वेव में इंसान खेती-बाड़ी तक आया , दूसरी में फैक्ट्री और मशीनो तक आया  और उसके बाद की  वेव, यानि थर्ड वेव  में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और  फेसबुक तक आगया और अभी भी आगे जाता जा रहा है।  पहली वेव में उसकी चलती थी जिसके बाजुओं में जान थी , दूसरी वेव में उसकी चली किसकी मशीनो में जान थी और तीसरी वेव में याने अभी उसकी चलती है जिसके दिमाग में जान है।  ये जमाना उनका है जिनके पास " एक्शनेबल नॉलेज " है।  " एक्शनेबल नॉलेज " को ही हम आईडिया कहते है। बिल गेट्स के आईडिया से निकले माइक्रोसॉफ्ट ने उनको दुनिया का सबसे अमीर इंसान बना दिया , जितना पैसा कमाने में वारेन बुफे को 40 से ज्यादा साल लगे उतना बिल गेट्स ने 10 साल में पीट लिया। मार्क ज़ुकरबर्ग , लॉरी पेज , सर्जेई ब्रिन , स्टीव जॉब्स , लारी ऐलिसन , स्कॉट मेकनेली , विनोद खोसला , सबीर भाटिया या नारायणमूर्ति ये सब वो लोग है जिन्होंने अपने आइडियाज के दम पे दुनिया को बदल दिया। वाकई आज का जमाना उनका है जिनके पास आईडिया है , एक्शनेबल नॉलेज है।  

कई बार दिमाग लगाता हूँ कि कोई ऐसा ही पाथ-ब्रेकिंग आईडिया मेरे दिमाग में भी आजाए , जिस से मै दुनिया को बदल दूँ और मेरी भी दुनिया बदल जाए।  कुछ आइडियाज आते भी है लेकिन पता पढता है कि वो पेहले ही किसी के दिमाग में आ चुके है।  अभी थोड़े दिन पहले अख़बार में आया कि बिल गेट्स ने एक कांटेस्ट का  एलान किया है कि वो भविष्य के लिए एक बेहतर कॉन्डम इन्वेंट   करने वाले को एक लाख डॉलर देंगे।  एक ऑपर्चुनिटी नज़र आयी कि शायद कोई ऐसा आईडिया आ जाए कि बात बन जाए।  बहुत सोचा , बहुत तरीके से सोचा मगर नतीज़ा सिफर रहा।  इतना आसान रहता कि मेरे जैसे टॉम 'डिक ' हैरी के दिमाग में आजाए तो बिल गेट्स एक लाख डालर देते क्या ? पहली  बार सुनके एब्सर्ड सा नज़र आने वाला ये कांटेस्ट असल में बिल ने बड़ी दूरगामी सोच और बड़े फायदों को ध्यान में रखकर लांच किया है।  अफ्रीका और एशिया में सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियां हर साल लाखों लोगो की जान ले लेती है , इन् बीमारियों के इलाज़ में लगने वाला पैसा और इससे होने वाले मैनपावर और मेन डेज़ के नुकसान को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि लोगो को  कॉन्डम का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाये। सुना है कि इस कांटेस्ट में 800 से ज्यादा एंट्रीज़ आयी और उनमे से 11 को फाइनली शॉर्टलिस्ट किया गया है।  जल्द ही एक और आईडिया दुनिया में सुखद और आनंददायी बदलाव लेकर आने वाला है , मतलब ये कि 1 लाख डालर  का कांटेस्ट  सबको लाखो का सुख देने वाला है।  वैसे बिल गेट्स के कॉन्टेस्ट पे आप भी आईडिएटे करके देखना , दिमागी मासपेशियों की फर्टिलिटी का अंदाज़ हो जाएगा।  


Monday, December 16, 2013

Chinese Humor

कल की पोस्ट चाइने का माल नी है पढ़ने के बाद दो लोगों ने फ़ोन लगाये। उनमे से एक ने चीन को लेकर थोड़ी देर चर्चा की और दूसरे ने चीन के ऊपर जोक  सुनाया  , 

एक हिंदुस्तानी कि चाइनीज़ महिला   से   शादी होती है , २ साल के बाद चाइनीज़ महिला गुज़र जाती है। संता  उसके यहाँ शोक व्यक्त करने आता है और कहता है " यार दुखी न हो , चाइनीज़ माल था  और कितना चलता " 

फिर चीन पे उनको  एक  जोक मैने सुनाया 

संता के यहाँ दूसरी संतान पैदा होती है , बर्थ सर्टिफिकेट में संता उसका नाम लिखवाता है "किआंग ज़ेपिन" 

लोग पूछते है , ये चाइनीज़ नाम क्यों ? 

 संता जवाब देता है " क्योकि मैंने अखबार में पढ़ा था कि दुनिया मै पैदा होने वाला हर दूसरा बच्चा चाइनीज़ होता है " 

चीन पे एक दिन डिटेल में लिखूंगा, IA 


Sunday, December 15, 2013

चाइने का माल नी है

आज साप्ताहिक हाट में सब्ज़ियाँ खरीदने गया था ,  सेब का एक दुकानदार ग्राहकी खीचने के लिए चिल्ला चिल्ला के बोल  रहा  रहा था -

सब सैमसंग नोकिआ है , सब  सैमसंग नोकिआ है  , चाइने का माल नी है .... 
सब सैमसंग नोकिआ है , सब  सैमसंग नोकिआ है  , चाइने का माल नी है . … 

ठेले - साइकिल पे माल बेचने वाले , हाट में या सड़कों पे दुकानदारी करने वाले ये स्ट्रीट वेंडर्स वाकई स्ट्रीटस्मार्ट होते है। इसी साप्ताहिक हाट में आँवले का एक दुकानदार " डाबर आँवला  -डाबर आँवला " की आवाज़ लगाता है , लास्ट दो सालों से मै उसी से आँवले खरीदता हूँ।  पहली बार उसकी  "डाबर आँवला" पंचलाइन से ही उसकी दुकान पे गया था।  बचपन में गाँव के साप्ताहिक हाट में एक आदमी चूहा मार बेचने आता था , उसकी पंचलाइन थी " अभी मार " , कई साल तक हर गुरुवार सुनी  उसकी "अभी मार- अभी मार " ऐसी बैठी दिमाग में कि आज तक याद है।  

ट्रेन के वेंडर्स तो और कमाल होते है लास्ट वीक ट्रेन में सफ़र करते दो स्ट्रीट स्मार्ट वेंडर्स से सामना हुआ , एक चाय बेचने वाला था उसकी पंचलाइन थी " सबसे ख़राब चाय पीलो - सबसे ख़राब चाय पीलो "। जब उससे पूछा कि क्या चाय इतनी ख़राब है ??  तो बोला सर आप एक दो घूंट पियोगे तब तक यही खड़ा रहूँगा ताकि आप पीने के बाद गुस्सा होकर एक दो थप्पड़ लगा सको।  5 -6 रूपए के नॉर्मल रेट कि जगह उसकी चाय 10 रूपए कि थी और निस्संदेह रेलवे में मिलने वाली चाय के मापदंड से निहायत ही उम्दा थी।    

एक और वेंडर मिला जो फ्रूटी बेच रहा था , उससे मिलके समझ में आगया कि जिसने भी कहा है कि ' आवश्यकता ही अविष्कार कि जननी है ' उसने कितना सटीक कहा है।  मैंने उससे फ्रूटी खरीदी जो 15 रूपए कि थी , 20 का नोट देने के बदले उसने जो 5 रूपए वापिस किये वो नीचे तस्वीर  में  देखिये - 




2 रूपए के दो सिक्कों के बीच में 1 रूपए के सिक्के को सैंडविच करके उसको सैलो टेप से चिपका कर तैयार हुआ 5 रूपए का सिक्का। समझाने कि आवश्यकता ही नहीं है कि कितना कारगर उपाय है ये चिल्लर कि मगज़मारी से निपटने का।  भारतीय जुगाड़ का एक और बेहतरीन उदाहरण। 









Thursday, December 12, 2013

शादी के ब्राइट इफेक्ट्स

आज मोबाइल पर एक जोक  आया , कुछ यूँ था : 

एक आदमी ट्रैन में चढ़ रहा था कि आकाशवाणी हुई " बच्चा इसमें मत चढ़ ये ट्रैन पटरी से उतरने वाली है " 
उस आदमी ने बस से यात्रा करने का विचार किया , जैसे ही वो बस में बैठने लगा फिर से आकशवाणी हुई " बच्चा इस बस में मत बैठ ये बस खाई में गिरने वाली है " 
उस आदमी ने फिर विचार बदला और हवाई जहाज़ से जाने का सोचा। जैसे ही वो हवाई जहाज़ में बैठने गया , फिर से आकाशवाणी हुई " बच्चा इस हवाई जहाज़ में मत बैठ ये क्रैश होने वाला है " 

फाइनली वो आदमी परेशां हो उठा और उसने आसमान को देख कर पूछा " ये कौन है ? जो बार बार आकाशवाणी कर मुझे बचा रहा है ?? 

जवाब आया " बच्चा में भगवान् हूँ " 

आदमी ने बड़ी पीढ़ा से कहाँ " भगवान् जिस दिन मै  घोड़ी पे चढ़ रहा था उस दिन क्या आपका गला ख़राब था ? " 

ये लतीफा एक अननोन नंबर से आया था , जिसने भी भेजा होगा वो करीबी ही रहा होगा क्योकि आज( 13 दिसंबर को)  मेरी शादी की  सातवी सालगिरह है।  

शादी को लेकर जोक्स बनाना और पत्नियों को लेकर व्यंग करना बड़ा ही आम है।  लेकिन जो लोग ऐसा करते है वो उन लोगो कि राह में मुश्किल पैदा करते है जिन्हे अभी शादी करना है।  ऐसे जोक्स पढ़ पढ़ के एस्पायरिंग लड़के लड़कियां कंफ्यूज होते है , डर भी जाते है। रही सही कसर टीवी के सोप्स  पूरी कर देते है।    लगता है शादी करके ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी।  आज़ादी छिन जाएगी।  लड़कियों को सबसे बड़ा डर सामूहिक परिवार और घर के कामों को लेकर होता है। लड़कियों के दिमाग में यह भी  आता है कि   पता नहीं कैसा जल्लाद निकलेगा पति और सास- ससुर ड्रैकुला के रिश्तेदार जो हर वक़्त खून पियेंगे। कई लोग एक्सपर्ट कमेंटस् देते मिल जाएंगे " भाई शादी तो एक लाटरी है " " शादी का  लड्डू जो खाए पछताए जो न खाए वो भी पछताए " आदि आदि।  शादी पे एक और कोट पढ़ा था कभी " Everyone should get married after all happiness is not the only thing in life "  शादी के ऊपर हज़ारों quotes है ऐसे।  शादी की  बात आते ही हर विवाहित एकदम मुखर और दर्शनशास्त्री टाइप हो जाता है। मेरे ख्याल से आदमी  के लिए शादी एक मेटामॉरफोसिस है , जो उसे इल्लीनुमा कीड़े से पतंगा बना देती है।  इसीलिए ये देखा गया है कि शादी के बाद आदमी ज्यादा फड़फड़ाने लगता है।  शादी पे एक और बड़ा सतही कोट है " marriage is the price that men pay for sex and sex is the price that women pay for marriage" ये सिर्फ शब्दो की बाज़ीगरी है  इसमें कोई तर्क या यथार्थ नहीं है ।  फरहान अख्तर और विद्या बालन की मूवी आने वाली है " शादी के साइड इफेक्ट्स " मेरे ख्याल से ये मूवी शादी जैसे निहायत ही नाज़ुक और जस्बाती विषय के साथ न्याय करेगी और बहोत सारे डरे हुए और कन्फ्यूज्ड युवा और युवतियों को प्रेरित करेगी शादी के बंधन में बंधने के लिए। शादी के साइड इफेक्ट्स हो या न हो शादी के बहोत से ब्राइट इफेक्ट्स होते है , जो शादी के बाद ही समझ आते है।
बिना मरे स्वर्ग नहीं है।  

और आखिरी में ये भी -

शादी करने के बाद और मोबाइल फ़ोन खरीदने के बाद दिल में क्या ख्याल आता है ?
ये कि थोड़े दिन और रुक जाता तो ज्यादा बेहतर मॉडल मिल जाता ;)







चित्र कथा

एक चित्र एक हज़ार शब्दो के बराबर होता है।
ये है हजार हजार शब्द के दो निबंध , एक हमारी शिक्षा प्रणाली पर और दूसरा हमारी जीवन  प्रणाली पर।  दोनों निबंध मेरे लिखे नहीं है , संकलित है।

Sunday, December 8, 2013

कुत्तों की पॉपकॉर्न

आज सुबह दवाई कि दुकान पर कुत्तों  के पॉपकॉर्न का पैकेट रखे देखा।  दुकान वाले ने भी बड़ी शान से सबसे आगे सजा के रखा  था।  कितने नसीब वाले होंगे वो सभी कुत्ते जिन्हे ये पॉपकॉर्न खाने को मिलती होगी।  मजे कि बात है , इंसान के खाने का ACT II instant पॉपकॉर्न पांच रूपए का आता है जबकि ये वाला 99 रूपए का था।  दुकान वाले से पूछा कि कोई खरीदता भी है ऐसी चीज़ें तो बोला सर कुछ भाभी लोग है जो अपनी खुद कि और बच्चो कि दवाइयां लेने नौकरो को पहुचाती है लेकिन कुत्तों के खाने का सामान खुद लेने आती है।  

मेरे हिसाब से इस पॉपकॉर्न का नाम PUPPYCORN होना चाहिए था , ज्यादा अपीलिंग लगता।  


Thursday, September 12, 2013

अफीमचियों की बस्ती


जर्मन इक्नामिस्ट फिलास्फर कार्ल मार्क्स ने बड़े फेमस्ली कहा है " Die Religion .. ist das Opium des Volkes "  मतलब Religion is the Opium of the People धर्म लोगो का नशा है।  अफीम का नशा
फिल्म ऒह माय गॉड के  क्लाइमेक्स में परेश रावल से  धर्मगुरु (मिथुन चक्रबोर्ति ) यही बोलता है कि लोग ज्यादा दिन हमारे बिना नहीं रह पाएँगे क्योकि धर्म इन लोगो का नशा है। अफीमची भी कई प्रकार के है, छोटे अफीमची बड़े अफीमची , कट्टर अफीमची , पागल अफीमची, फनाटिक अफीमची , चतुर अफीमची , बेवकूफ अफीमची। इन सबके ऊपर है  अफीमचियों को नचाने वाले मदारी और अफीम के सप्लायर। कुछ लोग अपनी अफीम की तलब को कस्टमाइज कर लेते है।  एक मेरा  दोस्त है जो  बुधवार  को नॉन-वेज नहीं खाता क्योकि उस दिन वो गणेशजी के मंदिर जाता है   ।  एक और है वो सोमवार को दारू नहीं पीता  क्योकि सोमवार शंकरजी का दिन है। इन अफीमचियों ने अपनी तलब को कस्टमाइज कर लिया है।

आजकल McD का एक एड आता है उसमे भी यही दिखाते है कि Tuesday होने के कारण अगर आप  चिकन मसाला  बर्गर नहीं खा सकता तो McD पे Veg मसाला बर्गर भी है।  क्योकि McD वाले भी जानते है कि इंसान बर्गर खाना छोड़ सकता है पर अफीम खाना नहीं।लोग हैरान होते है कि कैसे लाखो करोडो लोग एक ठरकी कथा वाचक बाबा के ऐसे अंधे भक्त हो सकते है  , जवाब है अफीम की तलब , सालो से जिन लोगो को धर्म की अफीम की लत है उन्हें क्या करना कि बाबा ठरकी है , उन्हें अफीम की आदत है और उनकी पसंद की अफीम बाबा देता है। इसलिए डरते है सारे नशेडी कि बाबा  की दुकान बंद हो गयी तो उनको अफीम कौन खिलाएगा।  और क्या पता फिर  अफीम में नशा  ही ना रहे।

गणपति की धूम है अभी, सुबह से जो भोपू बजना शुरू होते है तो फिर आधी रात के बाद ही रुकते है  , घर के पास एक झांकी से अभी शाम को एलान हो रहा था कि जिस  किसी सज्जन को तम्बोला खेलना है वो शीघ्र आजाए क्योकि आरती के बाद तम्बोला खेला जाएगा।

सब अफीमची है।

गणपति बप्पा मोरिया गणपति बप्पा मोरिया
अब तो भोपू बंद करदो सारा देश सोरिया


Tuesday, September 10, 2013

तुलसीजी में अंडा

एक मज़ेदार बात हुई।  3 दिन घर बंद था क्योकि सब बाहर गये थे , कल वापस आये तो देखा बालकनी में रखे तुलसी के गमले में कबूतर ने ( precisely कबूतरनी ने ) अंडा दे दिया है।

बड़ा धर्म-संकट है अब , बीबी बोलती है अंडा हटाओ तुलसीजी को जल  कैसे देंगे , हमारी तुलसीजी मुरझानी नहीं चाहिए।
 अंडा हमारे लिए अंडा है , 50 रूपए में एक दर्जन लेकिन कबूतरनी के लिए सिर्फ अंडा नहीं है। लेकिन  तुलसीजी भी कोई बगीचे का पौधा नहीं है, गुलाब या गेंदा जैसे।

अंडे को छेड़ा तो कबूतरनी का miscarriage हो सकता है और नहीं छेड़ा  तो फिर तुलसीजी को जल कैसे चढ़ेगा।  एक तरीका ये हो सकता है कि एक टेम्पररी घोंसला बनाया जाये और उसमे अंडे को शिफ्ट किया जाए

।

Monday, September 2, 2013

दुनिया जाए तेल लेने


तेल ने दुनिया का तेल निकाल रक्खा है।  अमरीका तेल के लिये पैसा  बहा रहा है , सीरिया खून बहा रहा है और हमारा देश तेल के लिए आंसू बहा रहा है। फिनांस मिनिस्टर सुबह -शाम चीखे  जा रहे है की  हमारा  रूपया  तेल की चिकनाई से  फिसल -फिसल के पाकिस्तान के रूपए से भी ज़्यादा  फिसड्डी हो गया है   लेकिन फिर भी  पेट्रोल पंप गुलज़ार है  तेल के प्यासों से, और सड़के हलकान है गाडियो की कतारों  से। किसी को परवाह नहीं कि राजा भोज अब गंगू तेली बनने की कगार पर है। 

 आजकल  टीवी और अख़बारों  में इंडियन इकॉनमी के बारे में इतना कुछ आ रहा है कि मुझे लगता है कि अगर मै अपनी बिल्डिंग के चौकीदार से भी पूछूं तो शायद वो भी मुझे Non Deliverable Forward और Current Account Deficit पे भाषण दे डाले। कितने मज़े की बात है कि जिस बीमारी का इलाज़ हम सबको  पता है हम उसको और बढ़ाये जा रहे है। 4 लोग एक ही इमारत से रोज़ एक ही ऑफिस जाते है , लेकिन सब अपनी -अपनी अलग कार से, फिर ऑफिस में सब  मिलकर देश के बिगड़े इकनोमिक सिनेरियो  पर ग्रुप डिस्कशन करते है।  घर से चार कदम दूर सब्ज़ी मंडी तक कार से जाते है फिर सरकार को सब्जियों के बढ़ते दाम  के लिए कोसते है। 

अभी हिन्दू में एक सज्जन को पढ़ा , प्याज़ के आसमान छूते दामों पे लिखते है कि प्याज़ कोई ऑक्सीजन नहीं है जिसके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते , अगर हमने एक महीने प्याज़ खाना बंद कर दिया तो गोदामों में  प्याज़ सड़ने लगेंगे और जमाखोरों को कीमतें कम करना ही पढेगी। कितना सरल उपाय है , और इतना सरल सा मार्केट  डायनामिक्स समझने के लिये आपको इकोनॉमिक्स में PG होना जरुरी नहीं , बस चिकन दो प्याज़ा को थोड़े दिन चिकन NO-प्याज़ा बनाइये और salad में प्याज़ की जगह खीरा खाइए , प्याज़ को अपनी औकात में आने में टाइम नहीं लगेगा  फिर।  ये अलग बात है कि कल मैंने खुद प्याज़ से लबरेज़ सब्ज़ी पकाई क्योकि मेरी बैंक का ATM लगातार रूपया  उगल रहा है और अगर पैसे ख़त्म भी होगये तो मै क्रेडिट कार्ड से प्याज़ खरीद लूँगा।  मेरी कार्ड कंपनी तो  उसको 9 आसान सी EMIs में 'जीरो परसेंट ब्याज और नो प्रोसेसिंग फी' पे कन्वर्ट भी  कर देगी , असली खेल यहाँ छुपा है।  और ये खेल  मेरी बिल्डिंग के चौकीदार को समझ नहीं आना है क्योकि उसके पास ना ATM है ना क्रेडिट कार्ड और वैसे भी  उसने तो  प्याज़ खाना उसी दिन से छोड़ दिया था जब से प्याज़ के दाम 10 रूपए किलो के ऊपर हो गये।  अब वो ये उम्मीद लगाये बैठा है कि सरकार शायद नेशनल फूड सिक्योरिटी बिल में बदलाव कर गेहूं चावल और मोटे अनाज के साथ -साथ आलू प्याज़ और सब्जियां भी 2 रूपए किलो में बाटना शुरू करदे।  जब सरकार पेट्रोल के प्यासे नौकरीपेशा लोगों को पाल सकती है तो उसका ऐसा सोचना ज़रा भी गैर-वाज़िब नहीं।