Wednesday, February 12, 2014

गुलज़ारी कीड़ा

पिछले वैलेंटाइन पे
तुमने गुलाबों के
जो फूल मुझको दिए थे
मै उन्हें सींचती रही , इस आस से
कि वो महकते रहेंगे
खिलते रहेंगे
हर दिन ताज़े गुलाबो से
पर फकत चार दिनों में जब
लगे मुरझाने गुलाब
और हफ्ते भर में
सुख गए और बिखरने लगे
छूने भर से
तो मैंने उन्हें कुछ यूं सहेजा
उन्हें हाथों से मसल कर
मिलाकर यादों की चाशनी
मैंने उनका गुलकंद बना लिया


Tuesday, February 11, 2014

ॐ मेरे आका

फुर्सत में बैठा इंसान बिला वजह खोजी और बुद्धिजीवी होने का प्रयास करता है।  आज घर में निठल्ले बैठे -बैठे पिस्ते के इस ज़िपर  पाउच पर नज़र पढ़ी।  ॐ मेरे आका अमेरिकन USA रोस्टेड  एन साल्टेड पिस्ता 


दिल्ली की किसी फर्म ने इसे इम्पोर्ट करके रीपेक किया है।  बड़े ही समझदार और दूरदर्शी व्यापारी मालूम पढ़ते है।  'लास (एंजिलिस)' होने की कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी।  अलादीन का  जिन्न  अगर माल नहीं बेच सका तो शंकर भगवान के नाम से तो  लोग खरीद ही लेंगे और अगर शंकरजी भी काम नहीं आये तो अमेरिका का नाम तो है ही। अमेरिका के नाम पे तो हमारे लोग सड़ी हुई 'मूमफली' को भी पिस्ता समझके खाने को तैयार रहते है।  वैसे " क्या हुक्म मेरे आका " की जगह "ॐ मेरे आका" सुनना फनी सा नहीं लगता ?   जैसे जिन्न वाराणसी या उज्जैन में आकर बस गया हो।  










Friday, February 7, 2014

गुलाबी गेंग

आज एक पुराना कोटेशन याद आगया,  Man loves little and often,woman much and rarely.... .प्रसंग ये था कि आज से वैलेंटाइन वीक शुरू हो गया है।मेरे घर के पास गुलदस्तों की दुकाने है लाइन से काफी सारी सो में भी गुलाब के फूल लेने वंहा रुक गया। फूलों कि दुकानो पे लड़के- लड़कियां ऐसे टूट रहे थे जैसे गुरूद्वारे के लंगर में मुफ्त का खाना बट रहा हो। 
  एक ख़ास बात नोटिस की कि ज़्यादातर  लड़कियां पीला गुलाब ले रही थी ( पीला गुलाब मतलब दोस्ती ) और लड़के सभी लाल गुलाब ले रहे थे ( लाल गुलाब मतलब प्यार )।  घर पे आकर बीबी को ये ऑब्जरवेशन सुनाया तो बोली " क्योकि लड़कियों की नज़रों में  फ्रेंडशिप ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है"।"और लड़कों के लिए दोस्ती वेटिंग का टिकट है जो कन्फर्मेशन की उम्मीद से खरीदा जाता है , जो कन्फर्म नहीं हुआ तो दूसरी ट्रैन पकड़ लेंगे"।   

पिराक लोर नेर्टींन

हिंदीभाषी प्रान्त से होने और हिंदी प्रेमी होने की वजह से  हिंदी की भाषागत् , मात्रा या  व्याकरण की गलतियों पर मेरी नज़र ज़रा ज्यादा ही जाती है।  10 दिन अहिंदीभाषी शहरों में घूमा तो ये देखा -






एक प्रसिद्द मंदिर के प्रवेश द्वार पर ये बोर्ड  लगा था -



लेकिन सबसे ज्यादा कौतूहल शौचालयो के ऊपर लगे बोर्ड्स ने पैदा किया।सारे शौचालयों पे " पिराक लोर  नेर्टींन " लिखा था।  थोडा विचारमंथन किया तो समझ आया कि क्या आशय है  "  पिराक लोर  नेर्टींन  " से