Friday, December 6, 2013

जगजीत सिंह ज़िंदा है

मिली हवाओ में उड़ने की वो सज़ा  यारों
के मै ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारों
मै बे-ख्याल मुसाफिर वो रास्ता यारों
कहाँ था बस में मेरे उसको रोकना यारों
मेरे कलम पे ज़माने की गर्द ऐसी थी
के अपने बारे में कुछ भी ना लिख सका यारों
तमाम शहर ही जिसकी तलाश में गुम था
मै उसके घर का पता किस से पूछता यारों। ..................... वसीम बरेलवी का कलाम है।

जगजीत सिंह ज़िंदा है।  किसी कि C ड्राइव में किसीकी E ड्राइव में किसी  की पेन ड्राइव में और बहोत सारी लॉन्ग ड्राइव्स में ।


Juggernaut


आज TV पे एक बाबाजी को ये कहावत बोलते सुना  ," भगवान् जगन्नाथ के रथ के सामने चलने वाले श्वान ( a dog ) को भी यह भ्रम रहता है कि रथ  वही खीच रहा है " ( महिमा  भगवान की  है , यहाँ  श्वान का महिमामंडन  नहीं हो रहा है ।  )

अंग्रेजी का  " Juggernaut " शब्द जगन्नाथ से बना है।  ऐसा कहा जाता है कि पुराने समय में जब ओडिशा के पूरी में भगवान जगन्नाथ कि रथ यात्रा निकलती थी तो उनके विशालकाय रथ के पहियों के नीचे भक्त खुद को आहूत कर देते थे और मोक्ष पाते   थे।  अंग्रेजी में Juggernaut का मतलब है एक विशालकाय वस्तु , आर्गेनाईजेशन , team , Naval Ship।   जगन्नाथ  ( जगत +नाथ ) मतलब दुनिया के स्वामी।   सामान्यतः जिन लोगो का नाम जगन्नाथ होता है उनको लोग प्यार से जग्गा या जग्गू बुलाते है।


Tuesday, December 3, 2013

जिहाले मस्ती मुकुंद रंजिश"


जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन बरंजिश , बेहाल-ए -हिजरा बेचारा दिल है 
सुनाई देती है जिसकी धड़कन , तुम्हारा दिल या हमारा दिल है

( मुझे रंजिश से भरी इन निगाहों से ना देखो क्योकि मेरा  बेचारा दिल जुदाई के मारे  यूँही बेहाल है।    जिस दिल कि धड़कन तुम सुन रहे हो वो तुम्हारा या मेरा ही दिल है ) 

ये गाना उन  दिनों का है जब मै तीसरी या चौथी class में था।  मिथुन चक्रबोर्ती और अनीता राज़ बस की छत पे और बैकग्राउंड में ये गाना , और गाने के बीच में मिथुन दादा का " कोई शक़ " बोलना।  कुछ ऐसी कशिश थी 'गुलामी ' के इस गाने में कि दिल और दिमाग में उतर गया।  बाद में जब समझ और शौक आया तो जाना कि ये गाना 'गुलज़ार' ने लिखा था, LP ( लक्ष्मीकांत -प्यारेलाल ) ने compose किया था   और लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार ने गाया था।  लेकिन गाने कि पहली लाइन क्या है ये कभी समझ नहीं आया। इसके बाद की lyrics हिंदी में थी सो समझ आ जाती थी।    कई साल तक इस गाने को मै  " जिहाले मस्ती मुकुंद रंजिश" सुनता रहा और गाता भी रहा।  मज़े कि बात थी कि गुजिश्ता सालो में कभी कोई ऐसा नहीं मिला जिसे ये गाना सही गाते पाया हो।आज बहोत दिनों बाद ये गाना फिर से सुना , बीबी से पूछा " ये गाना सुना है ? तो तपाक से बोली , हाँ , गुलामी का गाना है मिथुन बस के ऊपर बैठ के गाता है।  मैंने पूछा पहली लाइन क्या है तो बोली " जिहाले मस्ती मुकुंद " करके कुछ है , पूरी समझ नहीं आती लेकिन गाना बढ़िया है।  कुछ ऐसी सीरत है इस गाने में कि इतनी क्लिष्ट पहली लाइन के बावजूद आज भी ये गाना इतना अच्छा लगता है।  गुलामी 1985 में आयी थी।बहरहाल बात lyrics की , गूगल की कृपा से मैंने एक साल पहले इस गाने की पहली लाइन समझी और ये जाना कि  गुलज़ार ने ये गाना अमीर खुसरो कि एक बेहतरीन सूफियाना कविता से प्रेरित होकर बनाया था जिसकी पहली लाइन कुछ इस तरह है -

जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन तग़ाफ़ुल ,दौड़ाए नैना  बनाये बतियां 
 के ताब-ए-हिजरां न  दरम ए जाना , न लेहो काहे लगाये छतियां 

(मतलब , आँखे दौड़ाके और बाते बनाकर मेरी बेबसी को नज़रअंदाज़ ( तग़ाफ़ुल )  मत करो।  मेरे सब्र कि अब इन्तेहाँ हो गयी है , मुझे सीने से क्यों नहीं लगाते ) पहली लाइन पर्शियन में है और दूसरी बृज भाषा में। गुलज़ार ने इसके पहले 'ग़ालिब' से प्रेरित होकर एक गाना लिखा था " दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात  दिन" जो मौसम फ़िल्म में था।इरशाद कामिल का  " रांझणा " फ़िल्म में लिखा " तू  मन शुदी " भी अमीर ख़ुसरो की poem से inspired है।  

" मन तू शुदम  तू मन शुदी ,मन तू शुदम तू जान शुदी 
ताकस ना गोयद बाद अजीन , मन दीगरम तू दिगरी "

( मै तू हो गया हूँ और तू मै हो गयी है , मै जिस्म हूँ तू जान है , इसके बाद कोई नहीं कह पायेगा कि तू और मै जुदा है।  ) 

इरशाद कामिल का " कुन फाया कुन " भी क़ुरान कि आयत से प्रेरित है जिसका मतलब है " आपने ( अल्लाह ने ) कहा हो , और सब हो गया " .  "जिहाले मस्ती "  की मस्ती यु ही बनी रहेगी , LP  का म्यूजिक ही कुछ ऐसा था।  जिन्हे लिरिक्स पता है उनके लिए इस गाने का अलग ही मज़ा है जिन्हे नहीं पता उन्हें कोई फर्क नहीं पढ़ना। .. " कोई शक " 

Sunday, December 1, 2013

Whats Down

मेरे मोबाइल पे कल से whatsapp  नहीं चल रहा है।  ऐसा लग रहा है जैसे दिल को खून कि आपूर्ति रुक गयी हो , फेफड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही हो।  गोया  कि technology ना हुई biology हो गयी।

बड़ा ही अजीब लग रहा है , खिन्न सा।  क्या पता क्यों ? 

Sunday, November 24, 2013

The Alchemy of Desire


आज बड़े दिनों बाद कुछ लिखने का दिल किया , पिछले हफ्ते कि कुछ घटनाओ ने बड़ा असर डाला , सचिन तेंदुलकर का संन्यास , मैगनस Carlsen का विश्वनाथन आनंद को हराना और सबसे बड़ी घटना ( मेरी नज़र में ) तरुण तेजपाल  की   Alchemy of Desire का सार्वजनिक  हो जाना। तरुण तेजपाल को उस दिन से Follow करता हूँ जब उन्होंने तहलका किया था , जब ब्लॉग पे सबसे पहली पोस्ट लिखी थी उसमे भी उनका ज़िक्र था , तस्वीर भी डाली थी।  मेरी नज़र में कंटेम्पररी इंडिया के सबसे मुखर और हिम्मतवाले इंसानो में से एक। किस में दम है सरकार से भिड़ने का , इन्होने दिखाया था।  Sting Operations को भारतीय Lexicon में introduce ही इन्होने किया था।   उनकी पहली नोवेल Alchemy of Desire 2007 में पढ़ी थी , पहली लाइन आज तक याद है " Love is not  the greatest glue between two people , sex is " और आखिरी लाइन भी याद है  " Sex  is not  the greatest glue between two people , love  is "

इनकी magzine " तहलका " का सालाना जलसा  Thinkfest Goa में आयोजित होता है , 2011 के Thinkfest  में तेजपाल साहब ने कहाँ था " अब आप गोआ में है , जितना दिल करे पीजिये , जिसके साथ खाना है खाइये और जिसके साथ सोना है सोइये मगर सुबह जल्दी आजाइएगा  क्योकि कल packed house रहेगा " बड़ी चर्चा हुई थी तब इनके  के इस statement की। एक और Novel आया था The Story of my Assasins उसमे  इन्होने लिखा था “Power is the engine of the world,and sex and money its oil and lubricants.

मेरे ख्याल से तरुण तेजपाल के अंदर दो तरुण तेजपाल है , एक जो दिमाग से पत्रकार है और पत्रकारिता के पेशे का पूरी ईमानदारी और बेबाकी से निर्वहन करता है।  दूसरा दिल से लेखक है , जो सोचता है वही लिखता है और जो मानता है वही करता है। बहरहाल , तरुण तेजपाल के लिए मेरे दिल में जो सम्मान है वो कायम है , कायम रहेगा। बोहोत सारे लोग इनसे सालों से बैर पाले  बैठे है , पता नहीं क्या हश्र करेंगे फिर भी मेरी कामना है कि ये कम से कम तकलीफ पाएं।  अच्छे पत्रकारों कि बढ़ी ज़रूरत है