Sunday, December 8, 2013

कुत्तों की पॉपकॉर्न

आज सुबह दवाई कि दुकान पर कुत्तों  के पॉपकॉर्न का पैकेट रखे देखा।  दुकान वाले ने भी बड़ी शान से सबसे आगे सजा के रखा  था।  कितने नसीब वाले होंगे वो सभी कुत्ते जिन्हे ये पॉपकॉर्न खाने को मिलती होगी।  मजे कि बात है , इंसान के खाने का ACT II instant पॉपकॉर्न पांच रूपए का आता है जबकि ये वाला 99 रूपए का था।  दुकान वाले से पूछा कि कोई खरीदता भी है ऐसी चीज़ें तो बोला सर कुछ भाभी लोग है जो अपनी खुद कि और बच्चो कि दवाइयां लेने नौकरो को पहुचाती है लेकिन कुत्तों के खाने का सामान खुद लेने आती है।  

मेरे हिसाब से इस पॉपकॉर्न का नाम PUPPYCORN होना चाहिए था , ज्यादा अपीलिंग लगता।  


Friday, December 6, 2013

जगजीत सिंह ज़िंदा है

मिली हवाओ में उड़ने की वो सज़ा  यारों
के मै ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारों
मै बे-ख्याल मुसाफिर वो रास्ता यारों
कहाँ था बस में मेरे उसको रोकना यारों
मेरे कलम पे ज़माने की गर्द ऐसी थी
के अपने बारे में कुछ भी ना लिख सका यारों
तमाम शहर ही जिसकी तलाश में गुम था
मै उसके घर का पता किस से पूछता यारों। ..................... वसीम बरेलवी का कलाम है।

जगजीत सिंह ज़िंदा है।  किसी कि C ड्राइव में किसीकी E ड्राइव में किसी  की पेन ड्राइव में और बहोत सारी लॉन्ग ड्राइव्स में ।


Juggernaut


आज TV पे एक बाबाजी को ये कहावत बोलते सुना  ," भगवान् जगन्नाथ के रथ के सामने चलने वाले श्वान ( a dog ) को भी यह भ्रम रहता है कि रथ  वही खीच रहा है " ( महिमा  भगवान की  है , यहाँ  श्वान का महिमामंडन  नहीं हो रहा है ।  )

अंग्रेजी का  " Juggernaut " शब्द जगन्नाथ से बना है।  ऐसा कहा जाता है कि पुराने समय में जब ओडिशा के पूरी में भगवान जगन्नाथ कि रथ यात्रा निकलती थी तो उनके विशालकाय रथ के पहियों के नीचे भक्त खुद को आहूत कर देते थे और मोक्ष पाते   थे।  अंग्रेजी में Juggernaut का मतलब है एक विशालकाय वस्तु , आर्गेनाईजेशन , team , Naval Ship।   जगन्नाथ  ( जगत +नाथ ) मतलब दुनिया के स्वामी।   सामान्यतः जिन लोगो का नाम जगन्नाथ होता है उनको लोग प्यार से जग्गा या जग्गू बुलाते है।


Tuesday, December 3, 2013

जिहाले मस्ती मुकुंद रंजिश"


जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन बरंजिश , बेहाल-ए -हिजरा बेचारा दिल है 
सुनाई देती है जिसकी धड़कन , तुम्हारा दिल या हमारा दिल है

( मुझे रंजिश से भरी इन निगाहों से ना देखो क्योकि मेरा  बेचारा दिल जुदाई के मारे  यूँही बेहाल है।    जिस दिल कि धड़कन तुम सुन रहे हो वो तुम्हारा या मेरा ही दिल है ) 

ये गाना उन  दिनों का है जब मै तीसरी या चौथी class में था।  मिथुन चक्रबोर्ती और अनीता राज़ बस की छत पे और बैकग्राउंड में ये गाना , और गाने के बीच में मिथुन दादा का " कोई शक़ " बोलना।  कुछ ऐसी कशिश थी 'गुलामी ' के इस गाने में कि दिल और दिमाग में उतर गया।  बाद में जब समझ और शौक आया तो जाना कि ये गाना 'गुलज़ार' ने लिखा था, LP ( लक्ष्मीकांत -प्यारेलाल ) ने compose किया था   और लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार ने गाया था।  लेकिन गाने कि पहली लाइन क्या है ये कभी समझ नहीं आया। इसके बाद की lyrics हिंदी में थी सो समझ आ जाती थी।    कई साल तक इस गाने को मै  " जिहाले मस्ती मुकुंद रंजिश" सुनता रहा और गाता भी रहा।  मज़े कि बात थी कि गुजिश्ता सालो में कभी कोई ऐसा नहीं मिला जिसे ये गाना सही गाते पाया हो।आज बहोत दिनों बाद ये गाना फिर से सुना , बीबी से पूछा " ये गाना सुना है ? तो तपाक से बोली , हाँ , गुलामी का गाना है मिथुन बस के ऊपर बैठ के गाता है।  मैंने पूछा पहली लाइन क्या है तो बोली " जिहाले मस्ती मुकुंद " करके कुछ है , पूरी समझ नहीं आती लेकिन गाना बढ़िया है।  कुछ ऐसी सीरत है इस गाने में कि इतनी क्लिष्ट पहली लाइन के बावजूद आज भी ये गाना इतना अच्छा लगता है।  गुलामी 1985 में आयी थी।बहरहाल बात lyrics की , गूगल की कृपा से मैंने एक साल पहले इस गाने की पहली लाइन समझी और ये जाना कि  गुलज़ार ने ये गाना अमीर खुसरो कि एक बेहतरीन सूफियाना कविता से प्रेरित होकर बनाया था जिसकी पहली लाइन कुछ इस तरह है -

जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन तग़ाफ़ुल ,दौड़ाए नैना  बनाये बतियां 
 के ताब-ए-हिजरां न  दरम ए जाना , न लेहो काहे लगाये छतियां 

(मतलब , आँखे दौड़ाके और बाते बनाकर मेरी बेबसी को नज़रअंदाज़ ( तग़ाफ़ुल )  मत करो।  मेरे सब्र कि अब इन्तेहाँ हो गयी है , मुझे सीने से क्यों नहीं लगाते ) पहली लाइन पर्शियन में है और दूसरी बृज भाषा में। गुलज़ार ने इसके पहले 'ग़ालिब' से प्रेरित होकर एक गाना लिखा था " दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात  दिन" जो मौसम फ़िल्म में था।इरशाद कामिल का  " रांझणा " फ़िल्म में लिखा " तू  मन शुदी " भी अमीर ख़ुसरो की poem से inspired है।  

" मन तू शुदम  तू मन शुदी ,मन तू शुदम तू जान शुदी 
ताकस ना गोयद बाद अजीन , मन दीगरम तू दिगरी "

( मै तू हो गया हूँ और तू मै हो गयी है , मै जिस्म हूँ तू जान है , इसके बाद कोई नहीं कह पायेगा कि तू और मै जुदा है।  ) 

इरशाद कामिल का " कुन फाया कुन " भी क़ुरान कि आयत से प्रेरित है जिसका मतलब है " आपने ( अल्लाह ने ) कहा हो , और सब हो गया " .  "जिहाले मस्ती "  की मस्ती यु ही बनी रहेगी , LP  का म्यूजिक ही कुछ ऐसा था।  जिन्हे लिरिक्स पता है उनके लिए इस गाने का अलग ही मज़ा है जिन्हे नहीं पता उन्हें कोई फर्क नहीं पढ़ना। .. " कोई शक " 

Sunday, December 1, 2013

Whats Down

मेरे मोबाइल पे कल से whatsapp  नहीं चल रहा है।  ऐसा लग रहा है जैसे दिल को खून कि आपूर्ति रुक गयी हो , फेफड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही हो।  गोया  कि technology ना हुई biology हो गयी।

बड़ा ही अजीब लग रहा है , खिन्न सा।  क्या पता क्यों ?