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Saturday, April 5, 2014

अबकी बार मोदी सरकार

Courtesy- Google Images 
सब्ज़ी नहीं है तो खा लेंगे अचार
अबकी बार मोदी सरकार

रागिनी MMS 2 का बिजनेस रहा ज़ोरदार
अबकी बार मोदी सरकार

एंड्रोइड से पक गए  अब है विन्डोज़ फोन की दरकार
अबकी बार मोदी सरकार

मच्छर ने काटा हुआ मलेरिया का बुखार
अबकी बार मोदी सरकार

वाल्दिमीर पुतिन ने ओबामा को दिया ललकार
अबकी बार मोदी सरकार

चिली में आया भूकम्प, मच गया हाहाकार
अबकी बार मोदी सरकार

तनीषा को हो गया अरमान कोहली से प्यार
अबकी बार मोदी सरकार


और ये है घटिया तुकबंदी की इन्तेहाँ -

15 रुपए का सवा किलो आलू और 20 का सवा किलो प्याज़
अबकी बार मोदी सरकार

और आखिरी में ये भी ( शैलजा के SMS के  सौजन्य से )

NDA सरकार में किंगफ़िशर बियर का दाम - 75 रूपए बोतल

UPA सरकार में किंगफ़िशर बियर का दाम - 105 रुपए बोतल

दारु के दाम बढ़ाने वालों , जनता तुम्हे कभी माफ़ नहीं करेगी

अबकी बार मोदी सरकार

( शैलजा 25 बरस की  युवा मतदाता है )







Saturday, December 14, 2013

आप की जीत के मायने

आम आदमी पार्टी की चर्चा है हर तरफ , दिल्ली के विधान सभा चुनाव में जो करिश्मा हुआ वो वाकई हतप्रभ कर देने वाला है।  आप की जीत और अरविन्द केजरीवाल के बारे में लगातार लिखा जा रहा है।  गली के नुक्कड़ो से लेकर गांव कि चौपालों तक , पान कि दुकानो से लेकर बियर बारों तक  , आफिसों में , घरों में हर जगह आम आदमी पार्टी का गहन विश्लेषण हो रहा है, एक्सपर्ट कमेंट्स की  जा रही है।  एक परिचित  ने आज कहा कि अरविन्द केजरीवाल IRS में रहते तो 100 करोड़ कमाते , अब दिल्ली के cm बनकर 1000 करोड़ कमाने कि जुगत में है।  एक कि एक्सपर्ट कमेंट थी कि केजरीवाल बड़े बुद्धिमान इंसान है , उन्होंने अन्ना  हज़ारे के दम पर buzz क्रिएट  कि और उस buzz को वोट्स में कन्वर्ट  कर लिया।सोशल नेटवर्किंग साइट्स भरी पढ़ी है एंटी और प्रो केजरीवाल ओपिनियंस से।    देश में ज़म्हूरियत है और हर इंसान को अपने ख़यालात ज़ाहिर करने की आज़ादी है।

मै  कोई Psephologist नहीं हूँ , नाही इतना बुद्धिमान कि आम आदमी पार्टी या किसी भी राजनीतिक पार्टी की जीत या हार की  तार्किक विवेचना कर सकूँ।  फिर भी, आम आदमी पार्टी का देश के राजनीतिक क्षितिज पर आना और यूँ छा जाना मेरी नज़र में एक बड़ी घटना है , भारतीय राजनीति का बिग बेंग है।  अगर ये कारनामा आम आदमी पार्टी  की जगह किसी और ने किया होता और केजरीवाल की जगह और कोई भी रहा होता तो भी इस घटना का वही महत्व होता।  अब से पहले हमने ये सिर्फ विदेशी मुल्कों में देखा था कि कोई सफल व्यवसायी सब कुछ छोड़ कर न्यूयॉर्क का मेयर बन गया या एक औसत सा वकील 10 साल के भीतर राजनीतिक सीडियां चढ़ते हुए देश का राष्ट्रपति बन गया।  हमारे देश में सिर्फ राज्य सभा के नॉमिनेशंस में सचिन तेंदुलकर या लता मंगेशकर  राज्यसभा mp बन सकते है, अगर चुनाव लड़कर आने को कहाँ जाता  तो बहोत मुमकिन है ये लोग mp बनने से  इंकार कर देते । हमारे यहाँ राजनीती बपोती है उन सामंती पार्टियों की जिन्होंने सालो की मेहनत से खुद को राजनीति के अखाड़े में स्थापित किया है।  प्रबुद्ध एवं अभिजात वर्ग सिर्फ राजनीतिक हालत पर चिंतन एवं क्रंदन करता आया है , कभी राजनीति में उतरा नहीं।  साल दर साल उजागर होते घोटाले , एब्सर्डिटी की हद से भी नीचे जाने वाली बयानबाज़ी , भाई भतीजावाद ये सब होने के बाद भी आम इंसान सिर्फ यही सोच के रह जाता है कि हम क्या कर सकते है। साला सिस्टम ही ऐसा ही है।  

इस लिहाज़ से आम आदमी पार्टी का उदय एक मिसाल है ,  आम आदमी पार्टी ने इस सोच को पुख्ता किया है कि सिस्टम को बदला जा सकता है।  देश स्थापित राजनीतिक दलों और दलालों की मिल्कियत नहीं है।  एक साल के भीतर राजनीतिक परिद्र्श्य पर ऐसे छा जाना प्रेरित करेगा युवाओ को राजनीति की मुख्य धारा में आने को।  


Monday, September 2, 2013

दुनिया जाए तेल लेने


तेल ने दुनिया का तेल निकाल रक्खा है।  अमरीका तेल के लिये पैसा  बहा रहा है , सीरिया खून बहा रहा है और हमारा देश तेल के लिए आंसू बहा रहा है। फिनांस मिनिस्टर सुबह -शाम चीखे  जा रहे है की  हमारा  रूपया  तेल की चिकनाई से  फिसल -फिसल के पाकिस्तान के रूपए से भी ज़्यादा  फिसड्डी हो गया है   लेकिन फिर भी  पेट्रोल पंप गुलज़ार है  तेल के प्यासों से, और सड़के हलकान है गाडियो की कतारों  से। किसी को परवाह नहीं कि राजा भोज अब गंगू तेली बनने की कगार पर है। 

 आजकल  टीवी और अख़बारों  में इंडियन इकॉनमी के बारे में इतना कुछ आ रहा है कि मुझे लगता है कि अगर मै अपनी बिल्डिंग के चौकीदार से भी पूछूं तो शायद वो भी मुझे Non Deliverable Forward और Current Account Deficit पे भाषण दे डाले। कितने मज़े की बात है कि जिस बीमारी का इलाज़ हम सबको  पता है हम उसको और बढ़ाये जा रहे है। 4 लोग एक ही इमारत से रोज़ एक ही ऑफिस जाते है , लेकिन सब अपनी -अपनी अलग कार से, फिर ऑफिस में सब  मिलकर देश के बिगड़े इकनोमिक सिनेरियो  पर ग्रुप डिस्कशन करते है।  घर से चार कदम दूर सब्ज़ी मंडी तक कार से जाते है फिर सरकार को सब्जियों के बढ़ते दाम  के लिए कोसते है। 

अभी हिन्दू में एक सज्जन को पढ़ा , प्याज़ के आसमान छूते दामों पे लिखते है कि प्याज़ कोई ऑक्सीजन नहीं है जिसके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते , अगर हमने एक महीने प्याज़ खाना बंद कर दिया तो गोदामों में  प्याज़ सड़ने लगेंगे और जमाखोरों को कीमतें कम करना ही पढेगी। कितना सरल उपाय है , और इतना सरल सा मार्केट  डायनामिक्स समझने के लिये आपको इकोनॉमिक्स में PG होना जरुरी नहीं , बस चिकन दो प्याज़ा को थोड़े दिन चिकन NO-प्याज़ा बनाइये और salad में प्याज़ की जगह खीरा खाइए , प्याज़ को अपनी औकात में आने में टाइम नहीं लगेगा  फिर।  ये अलग बात है कि कल मैंने खुद प्याज़ से लबरेज़ सब्ज़ी पकाई क्योकि मेरी बैंक का ATM लगातार रूपया  उगल रहा है और अगर पैसे ख़त्म भी होगये तो मै क्रेडिट कार्ड से प्याज़ खरीद लूँगा।  मेरी कार्ड कंपनी तो  उसको 9 आसान सी EMIs में 'जीरो परसेंट ब्याज और नो प्रोसेसिंग फी' पे कन्वर्ट भी  कर देगी , असली खेल यहाँ छुपा है।  और ये खेल  मेरी बिल्डिंग के चौकीदार को समझ नहीं आना है क्योकि उसके पास ना ATM है ना क्रेडिट कार्ड और वैसे भी  उसने तो  प्याज़ खाना उसी दिन से छोड़ दिया था जब से प्याज़ के दाम 10 रूपए किलो के ऊपर हो गये।  अब वो ये उम्मीद लगाये बैठा है कि सरकार शायद नेशनल फूड सिक्योरिटी बिल में बदलाव कर गेहूं चावल और मोटे अनाज के साथ -साथ आलू प्याज़ और सब्जियां भी 2 रूपए किलो में बाटना शुरू करदे।  जब सरकार पेट्रोल के प्यासे नौकरीपेशा लोगों को पाल सकती है तो उसका ऐसा सोचना ज़रा भी गैर-वाज़िब नहीं।